छत्तीसगढ़ के लोक पर्व के चिन्हारी मितान मितानिन भोजली खोच के गिया बदे के तिहार ।
प्रदेश भर में बाजे गाजे के साथ धुमधाम से भोजली विसर्जित किया गया जिसमें बच्चे महिलाएं युवतियां शामिल रही पुरूष जन व्यवस्था संभालने में लगे रहे ।
छत्तीसगढ़ी पारंपरिक धुन में देवी गंगा ,देवी गंगा लहर छुरियां की गीत गाते घर से देव देवलाय मंदिर गांव के प्रतिष्ठित जन के यहां से विसर्जित करने तलाब की ओर क्रम बद्ध लाइन लग कर भोजली विसर्जित किया गया ।
भोजली विसर्जन करने के बाद उपस्थित लोगों ने एक दुसरे के कानों पर भोजली खोचकर गिया बदने बनाने की परंपरा को जीवीत रखें अब के युवा पिड़ी ने भी संजोए रखा
बड़े बुजुर्गो से आशिर्वाद लेकर अपने अपने घर की ओर गये।
भोजली को अपने सिर पर रखे ग्राम भाटापारा लोरमी झाफल व तखतपुर क्षेत्र से ग्राम सिंघनपुरी की तस्वीर व धुन में नाचते गाते झलकियां । 




