मोदी सरकार का चौंकाने वाला विदेशी कर्ज़

पिछले 7 सालों में, मोदी सरकार ने चुनावों के दौरान घोषित परियोजनाओं के लिए अंतरराष्ट्रीय बैंकों से भारी मात्रा में कर्ज़ लिया है।

आप जानकर हैरान रह जायेंगे, कितनी रकम?

भारत ने सिर्फ़ 7 सालों में विदेशी बैंकों से 91 अरब डॉलर (₹8,035,300 करोड़) का कर्ज़ लिया है।

8 सालों में ₹8 लाख करोड़ का विदेशी कर्ज़ यानी औसतन ₹1.2 लाख करोड़ प्रति वर्ष।

इस राशि पर भारत ₹45,000 करोड़ का तो वार्षिक ब्याज ही चुकाता है। यह सिर्फ़ ब्याज है। वास्तविक कर्ज़ मूलधन की अदायगी अलग से है।

आपको इसकी मात्रा का अंदाज़ा देने के लिए, ऐसे समझिये-
इस विदेशी कर्ज़ पर चुकाया जाने वाला ₹45,000 करोड़ का वार्षिक ब्याज (2018 से) भारत के उच्च शिक्षा पर पूरे वार्षिक बजट के बराबर है।

हर बार जब किसी राज्य में चुनाव होते हैं, पीएम मोदी नियमित रूप से चुनावी दौरे करते हैं और लाखों करोड़ रुपये की परियोजनाओं की घोषणा करते हैं। पिछले 11 सालों से, मोदी सरकार करों के मार्फ़त तो वसूल रही ही है और अगर इतना ही काफी नहीं है, तो मोदी सरकार विदेशी संस्थाओं से भारी मात्रा में कर्ज़ ले रही है।

इस भारी विदेशी कर्ज़ का बोझ कौन उठाएगा? हाँ – आप ही उठाएँगे।
हर चुनाव से पहले “लोगों को उपहार” के रूप में लाखों करोड़ रुपये देने का वादा ऐसे करेंगे जैसे वे अपनी जेब से पैसा खर्च कर रहे हों। हालांकि, दुखद सच्चाई यह है कि भारत की जनता सरकार के चुनावी वादों की भारी कीमत चुका रही है।

और भी दुखद बात? चुनाव खत्म होते ही वादे भुला दिए जाते हैं।
भारत सरकार सिर्फ़ इन झूठे चुनावी वादों को पूरा करने के लिए अरबों डॉलर उधार ले रहा है। और भारत की जनता आने वाले दशकों तक इस विदेशी कर्ज़ को चुकाती रहेगी।

रिपोर्ट!

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Rameshwar Puri Goswami
Editor

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